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शिक्षकों के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार की शुरुआत 1958 में की गई थी। इस योजना का उद्देश्य देश के कुछ बेहतरीन शिक्षकों के अद्वितीय योगदान का उत्सव मनाना और उन शिक्षकों को सम्मानित करना है जिन्होंने अपनी प्रतिबद्धता और उद्यमशीलता के माध्यम से न केवल स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार किया है, बल्कि अपने छात्रों के जीवन को भी समृद्ध किया है । 1960 के दशक के मध्य से, यह समारोह प्रति वर्ष भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन के अवसर पर 5 सितंबर (शिक्षक दिवस) को भी आयोजित किया जाता है।

 

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इस नई योजना की विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • शिक्षकों से https://education.gov.in पर ऑनलाइन स्व-नामांकन आमंत्रित किए जाते हैं ।
  • सभी नियमित शिक्षक पात्र हैं और न्यूनतम वर्षों की सेवा की आवश्यकता नहीं है। यह मेधावी युवा शिक्षकों को आवेदन करने में सक्षम बनाता है।
  • पुरस्कारों की संख्या को युक्तिसंगत बनाकर 47 (45 + 2) रखा गया है, जिससे पुरस्कारों की प्रतिष्ठा बहाल हुई है।
  • अंतिम चयन में किसी राज्य, केन्द्र शासित प्रदेश या संगठन का कोटा नहीं है। इससे उन्हें पुरस्कारों हेतु प्रतिस्पर्धा करने के लिए प्रोत्साहन मिलता है।
  • राष्ट्रीय स्तर की एक स्वतंत्र जूरी अंतिम चयन करती है।

शिक्षक दिवस संदेश :

ज्यादा जानकारी के लिए यहां क्लिक करें: http://nationalawardstoteachers.mhrd.gov.in